असम में कुर्सियों की कुश्ती! चुनाव से पहले NDA में सीटों की खींचतान

Lee Chang (North East Expert)
Lee Chang (North East Expert)

असम की राजनीति में चुनाव से पहले कुर्सियों की गणित तेज हो गई है. मंच पर भले ही गठबंधन की मुस्कान दिखाई दे रही हो, लेकिन पर्दे के पीछे सीटों की गिनती ऐसे हो रही है जैसे शादी में मिठाई के डिब्बे बंट रहे हों.

मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma विकास का एजेंडा लेकर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं, मगर असली परीक्षा चुनावी भाषण नहीं बल्कि सहयोगियों की महत्वाकांक्षाओं को मैनेज करना बन गई है.

गठबंधन की राजनीति: दोस्ती में भी सीटों का हिसाब

असम में एनडीए का गठबंधन ऊपर से मजबूत दिखता है, लेकिन अंदरखाने सीटों के सवाल पर खटपट जारी है. भाजपा के पुराने सहयोगी Asom Gana Parishad इस बार ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं. 2014 से साथ चल रही इस दोस्ती में अब हिस्सेदारी की नई बहस शुरू हो चुकी है. पार्टी के कार्यकर्ता चाहते हैं कि 2026 के चुनाव में एजीपी को ज्यादा सीटों पर मौका मिले. इससे भाजपा के लिए सीटों का गणित थोड़ा मुश्किल हो सकता है.

गठबंधन की राजनीति में सबको साथ रखना भी एक कला है और कभी-कभी जादू भी.

‘फ्रेंडली फाइट’ का नया फॉर्मूला

सीटों के बंटवारे में जब सहमति नहीं बनती, तो राजनीति में एक नया शब्द जन्म लेता है. फ्रेंडली फाइट. यानी दोस्ती भी रहेगी और मुकाबला भी होगा.

सीएम Himanta Biswa Sarma ने भी संकेत दिया है कि कुछ सीटों पर ऐसी स्थिति बन सकती है. शुरुआती बातचीत शुरू हो चुकी है और जल्द ही सीटों का फार्मूला तय करने की कोशिश हो रही है.

बोडोलैंड में असली सियासी टकराव

गठबंधन की सबसे पेचीदा कहानी बोडोलैंड क्षेत्र में लिखी जा रही है. United People’s Party Liberal ने 21 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. इनमें 15 सीटें बीटीसी क्षेत्र की हैं. दूसरी तरफ Bodoland People’s Front पहले से ही मजबूत दावेदारी कर रही है.

दोनों दलों के बीच पुराना राजनीतिक विवाद अब भी खत्म नहीं हुआ. दोनों साफ कह चुके हैं कि वे न तो साथ लड़ेंगे और न ही सीट शेयरिंग पर समझौता करेंगे. इससे भाजपा के सामने गठबंधन संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

विपक्ष भी तैयार कर रहा है अपना खेल

सिर्फ सत्ता पक्ष ही नहीं, विपक्ष भी इस चुनाव को आसान नहीं रहने देना चाहता. कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल एक साझा रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं. असम कांग्रेस के अध्यक्ष Gaurav Gogoi का कहना है कि चार विपक्षी दल मिलकर संयुक्त अभियान चलाने की तैयारी कर रहे हैं.

उनके मुताबिक चुनाव से पहले के अगले कुछ हफ्ते राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम होंगे.

चुनाव से पहले असम में सियासी तापमान

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, असम की राजनीति में गठबंधन की मजबूरियां और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं खुलकर सामने आने लगी हैं. भाजपा के लिए असली चुनौती सहयोगियों को संतुष्ट रखना है, जबकि विपक्ष के सामने कम समय में मजबूत नैरेटिव बनाने का दबाव है.

अभी तो सीटों की चर्चा चल रही है. चुनाव आते-आते यही चर्चा सीधे सियासी मुकाबले में बदलने वाली है.

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